Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

गणगौर व्रत कथा

पूरा पाठ पढ़ें, अपनी सुविधा से अक्षर बदलें और सुनते समय Pause या Stop करें।

0%0%

अध्याय 1

शिव-पार्वती के ग्राम-भ्रमण की लोककथा में कुछ स्त्रियाँ तुरंत अपनी छोटी-सी सामग्री लेकर स्वागत को आती हैं। अन्य अधिक सुंदर आयोजन की तैयारी में समय लगाती हैं। देवी के लिए अर्पण का भाव साधनों की भव्यता से बड़ा ठहरता है।

अध्याय 2

पार्वती के शिव-पूजन और मायके की माया का प्रसंग आगे आता है। अलग क्षेत्रों में कथा के दृश्य बदलते हैं, पर गौरी के प्रति स्नेह और दांपत्य की मंगलकामना बार-बार दिखाई देती है।

अध्याय 3

गणगौर के गीत, प्रतिमाएँ और शोभायात्राएँ सामुदायिक भागीदारी का अवसर भी हैं। इस मनन में किसी के छोटे अर्पण को कम न आँकें। किसी उत्सव में श्रम करने वाले लोगों को सम्मान देना और उन्हें साथ बैठाना भी भक्ति का व्यवहारिक रूप है।

अपने पाठ का संकल्प

पूरा पाठ पढ़ने के बाद खुद पुष्टि करें। यह केवल इसी browser में आपकी निजी गिनती है।

0 / 1

आज के पाठ के बाद

कुछ क्षण शांत बैठें। पाठ का एक भाव चुनें और सोचें कि उसे अपने आज के व्यवहार में कैसे लाएँ। यह वेबसाइट का मौलिक मनन-सुझाव है।

नाम स्मरण काउंटर खोलें ↗