अध्याय 1
शिव-पार्वती के ग्राम-भ्रमण की लोककथा में कुछ स्त्रियाँ तुरंत अपनी छोटी-सी सामग्री लेकर स्वागत को आती हैं। अन्य अधिक सुंदर आयोजन की तैयारी में समय लगाती हैं। देवी के लिए अर्पण का भाव साधनों की भव्यता से बड़ा ठहरता है।
अध्याय 2
पार्वती के शिव-पूजन और मायके की माया का प्रसंग आगे आता है। अलग क्षेत्रों में कथा के दृश्य बदलते हैं, पर गौरी के प्रति स्नेह और दांपत्य की मंगलकामना बार-बार दिखाई देती है।
अध्याय 3
गणगौर के गीत, प्रतिमाएँ और शोभायात्राएँ सामुदायिक भागीदारी का अवसर भी हैं। इस मनन में किसी के छोटे अर्पण को कम न आँकें। किसी उत्सव में श्रम करने वाले लोगों को सम्मान देना और उन्हें साथ बैठाना भी भक्ति का व्यवहारिक रूप है।