
Hanuman · बल · सेवा · निष्ठा
परिचय
लंका जाने से पहले हनुमान चुपचाप बैठे थे; उन्हें अपने बल का भान नहीं था। जामवंत ने कहा — "तुम पवन-पुत्र हो, तुम्हारे लिए यह समुद्र क्या है?" — और वही हनुमान एक छलाँग में पार हो गए। बाबा नीब करौरी हनुमान के भक्त थे और कैंची धाम में हनुमान ही केंद्र में हैं; सेवा को ही उन्होंने सबसे बड़ी भक्ति कहा।
आज का मौलिक मनन
तुम्हारी शक्ति तुम्हें याद दिलानी पड़ती है। आज किसी की सेवा में उसे पहचानो।
हनुमान को अपनी शक्ति याद नहीं थी — जामवंत को याद दिलानी पड़ी, तब समुद्र पार हुआ। तुम्हारे साथ भी यही है: जो कर सकते हो, उसका अंदाज़ा तुम्हें नहीं है, क्योंकि तुमने खुद को कभी किसी और के लिए पूरी तरह लगाया नहीं। शक्ति आईने में नहीं दिखती, सेवा में दिखती है। आज किसी का बोझ उठाओ — तभी पता चलेगा कंधे कितने मज़बूत हैं।
छोटा अभ्यास
आज एक काम किसी और के लिए, बिना बताए।
आज एक काम चुनो जो किसी और का है — घर का, दफ़्तर का, पड़ोस का — और उसे बिना बताए पूरा कर दो। किसी को पता न चले, धन्यवाद की प्रतीक्षा न हो। शाम को सिर्फ़ यह देखो कि मन कैसा है।
ये मौलिक devotional reflections हैं; भविष्यवाणी या किसी देवता का उद्धरण नहीं।