Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

श्री पवनसुत हनुमान आरती

पूरा पाठ पढ़ें, अपनी सुविधा से अक्षर बदलें और सुनते समय Pause या Stop करें।

0%0%

॥ श्री पवनसुत हनुमान आरती ॥

जयति मंगलागार, संसार,

भारापहर, वानराकार विग्रह पुरारी।

राम-रोषानल, ज्वालमाला

मिषध्वान्तचर-सलभ-संहारकारी॥

जयति मरुदन्जनामोद-मन्दिर,

नतग्रीवसुग्रीव-दुःखैकबन्धो।

यातुधानोद्धत-क्रुद्ध-कालाग्निहर,

सिद्ध-सुर-सज्जनानन्दसिन्धो॥

जयति रुद्राग्रणी, विश्ववन्द्याग्रणी,

विश्वविख्यात-भट-चक्रवर्ती।

सामगाताग्रणी, कामजेताग्रणी,

रामहित, रामभक्तानुवर्ती॥

जयति संग्रामजय, रामसन्देशहर,

कौशला-कुशल-कल्याणभाषी।

राम-विरहार्क-संतप्त-भरतादि

नर-नारि-शीतलकरणकल्पशाषी॥

जयति सिंहासनासीन सीतारमण,

निरखि निर्भर हरष नृत्यकारी।

राम संभ्राज शोभा-सहित सर्वदा

तुलसि-मानस-रामपुर-विहारी॥

अपने पाठ का संकल्प

पूरा पाठ पढ़ने के बाद खुद पुष्टि करें। यह केवल इसी browser में आपकी निजी गिनती है।

0 / 1

आज के पाठ के बाद

कुछ क्षण शांत बैठें। पाठ का एक भाव चुनें और सोचें कि उसे अपने आज के व्यवहार में कैसे लाएँ। यह वेबसाइट का मौलिक मनन-सुझाव है।

नाम स्मरण काउंटर खोलें ↗