केदारनाथ मंदिर
उत्तराखंड
मंदाकिनी घाटी के हिमालयी तीर्थ में केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों और पंच केदार में गिने जाते हैं।
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उत्तराखंड
मंदाकिनी घाटी के हिमालयी तीर्थ में केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों और पंच केदार में गिने जाते हैं।
उत्तराखंड
चंद्रशिला के निकट तुंगनाथ पंच केदार का ऊँचाई पर स्थित शिवालय है। यहाँ पहुँचने का मार्ग चोपता की ओर से जाता है।
उत्तराखंड
गढ़वाल का रुद्रनाथ पंच केदार परंपरा में शिव के मुख-रूप से जुड़ा वन-पर्वतीय तीर्थ है।
उत्तराखंड
मध्यमहेश्वर पंच केदार का तीर्थ है। शिव के मध्य/नाभि-स्वरूप से जुड़ी इसकी स्थानीय परंपरा हिमालयी यात्रा से संबंधित है।
उत्तराखंड
उर्गम घाटी में कल्पेश्वर पंच केदार का जटा-स्वरूप वाला तीर्थ माना जाता है।
उत्तराखंड
अलकनंदा तट पर बद्रीनाथ नारायण को समर्पित प्रमुख हिमालयी मंदिर है। यह अखिल भारतीय चार धाम और उत्तराखंड चार धाम दोनों परंपराओं में आता है।
गुजरात
गोमती तट की द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर कृष्ण को समर्पित है। पश्चिम का यह तीर्थ चार धाम की परंपरा में शामिल है।
ओडिशा
पुरी का जगन्नाथ मंदिर जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की उपासना का प्रमुख केंद्र है। इसकी वार्षिक रथयात्रा प्रसिद्ध है।
तमिलनाडु
रामेश्वरम द्वीप का रामनाथस्वामी मंदिर शिव और रामायण-परंपरा से जुड़ा है। यह चार धाम और ज्योतिर्लिंग दोनों सूचियों में आता है।
उत्तर प्रदेश
वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में शिव की ज्योतिर्लिंग-परंपरा का केंद्र है। गंगा और काशी के तीर्थ-भूगोल से इसका गहरा संबंध है।
गुजरात
प्रभास पाटन के समुद्रतट पर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है। मंदिर के पुनर्निर्माणों का इतिहास इसकी आधुनिक पहचान का हिस्सा है।
आंध्र प्रदेश
श्रीशैलम में मल्लिकार्जुन शिव और भ्रमराम्बा देवी की संयुक्त तीर्थ-परंपरा है। कृष्णा नदी और नल्लमला क्षेत्र से इसका संबंध है।
मध्य प्रदेश
उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग शैव उपासना का प्रमुख केंद्र है। भस्म-आरती की विशेष परंपरा के लिए जाना जाता है।
मध्य प्रदेश
नर्मदा के मांधाता द्वीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग-परंपरा का तीर्थ है। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर का संबंध स्थानीय तीर्थ-विवरण में साथ आता है।
महाराष्ट्र
सह्याद्रि में भीमाशंकर महाराष्ट्र का ज्योतिर्लिंग तीर्थ है। वनक्षेत्र और भीमा नदी की परंपरा से इसका संबंध है।
महाराष्ट्र
नाशिक के निकट त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रह्मगिरि और गोदावरी की उद्गम-परंपरा से जुड़ा है।
झारखंड
देवघर का बैद्यनाथ धाम शिव-उपासना और श्रावणी यात्रा का प्रमुख केंद्र है। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर कुछ परंपराएँ परली को भी मानती हैं।
गुजरात
द्वारका के निकट नागेश्वर ज्योतिर्लिंग-परंपरा का शिव मंदिर है। दारुकावन के स्थान संबंधी परंपराओं में मतभेद मिलते हैं।
महाराष्ट्र
एलोरा के निकट घृष्णेश्वर महाराष्ट्र का ज्योतिर्लिंग मंदिर है। इसे घुश्मेश्वर नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर रामलला को समर्पित है। सरयू और रामायण के तीर्थ-नगर की पहचान इसके संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश
मथुरा का कृष्ण जन्मस्थान परिसर कृष्ण-जन्म की परंपरा का केंद्र है। ब्रज के अन्य तीर्थों के साथ इसकी यात्रा की जाती है।
असम
गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर कामाख्या शक्तिपीठ है। अंबुबाची उत्सव इसकी प्रमुख स्थानीय परंपराओं में है।
उत्तराखंड
हरिद्वार की हर की पौड़ी गंगा-तट का पवित्र घाट है, अकेला मंदिर नहीं। गंगा-आरती और स्नान-परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
दिल्ली
दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम स्वामीनारायण परंपरा का सांस्कृतिक-आध्यात्मिक परिसर है। नक्काशी, उद्यान और प्रदर्शनियाँ इसकी विशेषताएँ हैं।
मध्य प्रदेश
गढ़ा, छतरपुर का बागेश्वर धाम हनुमान-बालाजी उपासना का केंद्र है। इसे उत्तराखंड के बागेश्वर नगर से अलग पहचानें।
केरल
तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में अनंतशायी विष्णु की उपासना होती है। त्रावणकोर की परंपरा और स्थापत्य से इसका संबंध है।
मध्य प्रदेश
उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्षेत्रपाल भैरव की उपासना का केंद्र है। इसे काशी के कालभैरव मंदिर से अलग पहचानें।
दिल्ली
दिल्ली के छतरपुर का आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ विस्तृत देवी-मंदिर परिसर है। नवरात्रि के आयोजन यहाँ विशेष रहते हैं।
दिल्ली
नई दिल्ली का लक्ष्मीनारायण मंदिर बिड़ला मंदिर नाम से प्रसिद्ध है। मुख्य उपासना लक्ष्मी और नारायण की है।
उत्तर प्रदेश
गोरखपुर का गोरखनाथ मठ नाथ योग परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है। गुरु गोरखनाथ और मकर संक्रांति के खिचड़ी मेले से इसकी पहचान जुड़ी है।
उत्तराखंड
नैनीताल क्षेत्र में कैंची धाम नीम करौली बाबा और हनुमान-उपासना से जुड़ा आश्रम-मंदिर है। कुमाऊँ के पर्वतीय मार्ग पर स्थित है।
हिमाचल प्रदेश
शिमला की जाखू पहाड़ी पर हनुमान मंदिर रामायण की संजीवनी-यात्रा की स्थानीय परंपरा से जुड़ा है।
तमिलनाडु
कांचीपुरम का एकाम्बरेश्वर मंदिर पंचभूत स्थलों में पृथ्वी-तत्त्व से संबंधित शिवालय है। विशाल गोपुरम इसकी प्रमुख स्थापत्य विशेषता है।
आंध्र प्रदेश
तिरुपति के ऊपर तिरुमला की सप्तगिरि में वेंकटेश्वर की उपासना होती है। श्रीवैष्णव परंपरा और ब्रह्मोत्सव इसके प्रमुख संदर्भ हैं।
मदुरै · तमिलनाडु
मदुरै का मंदिर मीनाक्षी और सुंदरेश्वर को समर्पित है। रंगीन गोपुरम और चित्तिरै उत्सव के दिव्य विवाह की परंपरा इसकी पहचान हैं।
केरल
गुरुवायूर में कृष्ण के गुरुवायूरप्पन स्वरूप की उपासना होती है। केरल की मंदिर-संगीत, अनुष्ठान और उत्सव परंपराओं से यह जुड़ा है।
केरल
पश्चिमी घाट के सबरीमला में अय्यप्पा की उपासना होती है। मंडल साधना और मकरविलक्कु यात्रा-काल इसके प्रमुख संदर्भ हैं।
कटरा · जम्मू-कश्मीर
त्रिकूट पर्वत की गुफा-तीर्थ परंपरा में माता वैष्णो देवी के पिंडी-स्वरूपों के दर्शन होते हैं। कटरा यात्रा का आधार नगर है।
मुंबई · महाराष्ट्र
प्रभादेवी का सिद्धिविनायक मंदिर गणेश-उपासना का प्रसिद्ध केंद्र है। मुंबई के सार्वजनिक और पारिवारिक भक्ति-जीवन में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
पश्चिम बंगाल
हुगली तट के दक्षिणेश्वर में भवतारिणी काली की उपासना होती है। रानी रासमणि और रामकृष्ण परमहंस के जीवन से यह तीर्थ जुड़ा है।
कोलकाता · पश्चिम बंगाल
कोलकाता का कालीघाट काली-उपासना और शक्तिपीठ परंपरा का केंद्र है। इसे दक्षिणेश्वर से अलग तीर्थ के रूप में पहचानें।
वृंदावन · उत्तर प्रदेश
वृंदावन में बाँके बिहारी की उपासना स्वामी हरिदास की भक्ति-परंपरा से जुड़ी है। झाँकी-दर्शन और ब्रज के उत्सव इसके विशेष रूप हैं।
नाथद्वारा · राजस्थान
नाथद्वारा में श्रीनाथजी की सेवा पुष्टिमार्ग की परंपरा में होती है। कृष्ण के गोवर्धनधारी स्वरूप, झाँकियों और पिचवाई कला से इसका संबंध है।
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