अध्याय 1
शनि के जन्म के आख्यान सूर्य, संज्ञा और छाया से जुड़े हैं। अलग पुराण और लोककथाएँ इनके संबंधों का विवरण अलग ढंग से देती हैं। इस स्मृति में परिवार के भीतर पहचान और स्वीकार का प्रश्न भी दिखाई देता है।
अध्याय 2
कुछ कथाओं में शनि के स्वरूप को देखकर संदेह होता है। वे शिव-स्मरण और तप से अपना स्थान प्राप्त करते हैं। नवग्रह की उपासना में उनकी पहचान कर्मफल और न्याय के भाव से जुड़ती है।
अध्याय 3
किसी का रंग, रूप या जन्म उसकी गरिमा तय नहीं करता। इस आख्यान को भेदभाव का आधार बनाने के बजाय धैर्य और निष्पक्षता की ओर पढ़ें। धार्मिक प्रतीकों और आधुनिक खगोलीय ग्रह शनि के वैज्ञानिक अध्ययन में भी अंतर बनाए रखें।