अध्याय 1
साढ़ेसाती ज्योतिष की एक परंपरागत अवधारणा है, जिसमें जन्म-चंद्र के आसपास शनि के गोचर की अवधि पर विचार होता है। यह कोई एक स्वतंत्र प्राचीन कथा का शीर्षक नहीं; इसके साथ कई दृष्टांत जोड़े जाते हैं।
अध्याय 2
विक्रमादित्य की लोककथा उनमें प्रसिद्ध है। पद और सुविधा से वंचित राजा का अनुभव उसे दूसरों की कठिनाई के प्रति विनम्र बनाता है। इस संग्रह में उस आख्यान का अलग पन्ना भी उपलब्ध है।
अध्याय 3
इस परिचय को निश्चित अनिष्ट की भविष्यवाणी न मानें। डर पर आधारित महँगे उपायों के बजाय वास्तविक समस्या, भरोसेमंद सलाह और व्यावहारिक सहायता पर ध्यान दें। पूजा आपकी आस्था का सहारा हो सकती है, पर निर्णय में तथ्यों और अपनी परिस्थिति को स्थान दें।