
Lakshmi · समृद्धि · कृतज्ञता · सौंदर्य
परिचय
समुद्र-मंथन से लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने विष्णु को चुना — उस देव को जो शांत था, जिसे कुछ माँगना नहीं था। कहते हैं लक्ष्मी चंचल हैं — वे वहाँ नहीं टिकतीं जहाँ लोभ है, अपमान है, गंदगी है; वे वहाँ रुकती हैं जहाँ स्वच्छता, विनम्रता और आभार है। दीपावली की रात दीया जलाना इसी का प्रतीक है — पहले प्रकाश करो, फिर लक्ष्मी आती हैं।
आज का मौलिक मनन
जो है, उसे गिनो — जो नहीं है, वह अपने आप रास्ता बना लेगा। कृतज्ञता ही निमंत्रण है।
लक्ष्मी वहाँ ठहरती हैं जहाँ कृतज्ञता है, क्योंकि जो है उसकी क़द्र करने वाला ही और सँभाल पाता है। हम दिन भर "क्या नहीं है" की सूची बनाते रहते हैं और फिर हैरान होते हैं कि मन खाली क्यों है। आज सूची पलटो — जो है, उसे गिनो: छत, भोजन, दो लोग जो फ़ोन उठाते हैं, चलते हुए पैर। जो कमी है, वह अपने समय पर पूरी होगी; पर कृतज्ञता आज से शुरू हो सकती है, और वही समृद्धि का पहला निमंत्रण है।
छोटा अभ्यास
आज तीन चीज़ें लिखो जिनके लिए आभारी हो।
आज रात सोने से पहले कागज़ पर तीन बातें लिखो जिनके लिए तुम आज आभारी हो — बड़ी नहीं, छोटी: किसी की मुस्कान, गरम खाना, एक अच्छी नींद। हर बात के आगे लिखो कि यह किसकी वजह से मिली। यह कागज़ पर्स में रखो और कल एक बार पढ़ो।
ये मौलिक devotional reflections हैं; भविष्यवाणी या किसी देवता का उद्धरण नहीं।