अध्याय 1
दीपावली के साथ अनेक कथाएँ जुड़ी हैं। एक परंपरा में बलि का दान और विष्णु का वामन स्वरूप प्रमुख है। वामन तीन पग भूमि माँगते हैं और फिर उनके विराट रूप के सामने राजा के अधिकार की सीमा स्पष्ट होती है।
अध्याय 2
बलि अपने वचन से नहीं हटते। कथा उनके दान और विनम्रता का सम्मान करती है। दीपदान और मंगल के वर का प्रसंग इस आख्यान को उत्सव की स्मृति से जोड़ता है; दूसरे क्षेत्रों में राम की अयोध्या-वापसी तथा लक्ष्मी के प्राकट्य पर बल है।
अध्याय 3
एक ही पर्व की इन अलग स्मृतियों का सम्मान करें। घर में प्रकाश के साथ ईमानदार लेन-देन, सुरक्षित दीये और पड़ोस के प्रति संवेदना भी उत्सव का हिस्सा हैं। पूजन को निश्चित धन-लाभ का सूत्र समझने के बजाय कृतज्ञता का अवसर बनाएँ।