Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

त्रिपुरासुर वध कथा

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अध्याय 1

तारकासुर के पुत्र तपस्या और वरदान से तीन असाधारण नगर प्राप्त करते हैं। मय के बनाए वे नगर सामर्थ्य और सुरक्षा का प्रतीक थे। समय के साथ उस सामर्थ्य के साथ अत्याचार बढ़ने लगता है।

अध्याय 2

देवता शिव का आश्रय लेते हैं। आख्यान में एक विशेष क्षण पर तीनों पुर एक पंक्ति में आते हैं और शिव एक बाण से उनका अंत करते हैं। इसी स्मृति में शिव को त्रिपुरारी कहा जाता है।

अध्याय 3

कथा को पढ़ते समय सामर्थ्य और उसका नैतिक उपयोग अलग-अलग देखें। अपनी सुरक्षा या सुविधा को दूसरे के कष्ट का कारण बना देना अधर्म की दिशा है। आज का मनन अपने किसी अधिकार या संसाधन का उपयोग जिम्मेदारी से करना है।

अपने पाठ का संकल्प

पूरा पाठ पढ़ने के बाद खुद पुष्टि करें। यह केवल इसी browser में आपकी निजी गिनती है।

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आज के पाठ के बाद

कुछ क्षण शांत बैठें। पाठ का एक भाव चुनें और सोचें कि उसे अपने आज के व्यवहार में कैसे लाएँ। यह वेबसाइट का मौलिक मनन-सुझाव है।

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