Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

श्री रामायणजी की आरती

पूरा पाठ पढ़ें, अपनी सुविधा से अक्षर बदलें और सुनते समय Pause या Stop करें।

0%0%

॥ श्री रामायणजी की आरती ॥

आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद।

शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत वेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस।

मुनि-मन धन सन्तन को सरबस। सार अंश सम्मत सबही की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

गावत सन्तत शम्भू भवानी। अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी।

व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

कलिमल हरनि विषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।

दलन रोग भव मूरि अमी की। तात मात सब विधि तुलसी की॥

आरती श्री रामायण जी की।

कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

अपने पाठ का संकल्प

पूरा पाठ पढ़ने के बाद खुद पुष्टि करें। यह केवल इसी browser में आपकी निजी गिनती है।

0 / 1

आज के पाठ के बाद

कुछ क्षण शांत बैठें। पाठ का एक भाव चुनें और सोचें कि उसे अपने आज के व्यवहार में कैसे लाएँ। यह वेबसाइट का मौलिक मनन-सुझाव है।

नाम स्मरण काउंटर खोलें ↗