अध्याय 1
जनक के दरबार में शिव-धनुष और सीता के स्वयंवर का आयोजन था। राम विश्वामित्र के साथ वहाँ आते हैं। उनके हाथों धनुष उठने और टूटने का दृश्य रामायण की प्रसिद्ध स्मृति है।
अध्याय 2
अयोध्या और मिथिला के परिवार मिलते हैं। राम-सीता के साथ लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह का वर्णन भी आता है। उत्सव केवल दो व्यक्तियों का नहीं, परिवारों और नगरों का मिलन बनता है।
अध्याय 3
इस प्रसंग का अपना मनन विनम्रता और परस्पर आदर है। विवाह के आयोजन में दिखावे से अधिक संबंधित व्यक्तियों की सहमति, गरिमा और सहजता को महत्व देना आज भी आवश्यक है।