Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

शबरी का स्वागत

पूरा पाठ पढ़ें, अपनी सुविधा से अक्षर बदलें और सुनते समय Pause या Stop करें।

0%0%

राम और लक्ष्मण वन में सीता की खोज करते हुए शबरी के आश्रम पहुँचते हैं। वाल्मीकि रामायण के अरण्यकाण्ड में शबरी का परिचय अपने गुरुजनों की सेवा और तप में लगी साधिका के रूप में आता है। वह राम का स्वागत करती हैं और अपने आश्रम तथा गुरु-परंपरा से जुड़ी बातें बताती हैं।

कथा में उनकी प्रतीक्षा और आतिथ्य के साथ साधना की निरंतरता का भाव जुड़ा है। लोकप्रिय मौखिक कथाओं में “जूठे बेर” का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है, लेकिन हर रामायण-ग्रंथ में एक ही विवरण नहीं है। इस पृष्ठ में उसे वाल्मीकि के मूल पाठ का हिस्सा बताकर नहीं जोड़ा गया है।

यह अरण्यकाण्ड 74 का मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन है। अलग काव्य और लोक-परंपराओं के अंतर समझते हुए पढ़ना कथा के प्रति सम्मान बढ़ाता है। मनन करें: अतिथि का सम्मान केवल वस्तु की कीमत से नहीं, ध्यान और सद्भाव से कैसे व्यक्त होता है?

अपने पाठ का संकल्प

पूरा पाठ पढ़ने के बाद खुद पुष्टि करें। यह केवल इसी browser में आपकी निजी गिनती है।

0 / 1

आज के पाठ के बाद

कुछ क्षण शांत बैठें। पाठ का एक भाव चुनें और सोचें कि उसे अपने आज के व्यवहार में कैसे लाएँ। यह वेबसाइट का मौलिक मनन-सुझाव है।

नाम स्मरण काउंटर खोलें ↗