Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

शनि प्रदोष व्रत कथा

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अध्याय 1

एक निर्धन स्त्री अपने पुत्र के साथ अनाथ हुए राजकुमार को भी आश्रय देती है। अभाव के बावजूद वह दूसरे बच्चे को पराया नहीं मानती। ऋषि शांडिल्य उसे शिव-स्मरण और प्रदोष की परंपरा का मार्ग बताते हैं।

अध्याय 2

एक दिन उसके अपने पुत्र को धन मिलता है। राजकुमार उस पर अपना अधिकार नहीं जताता। आगे वन में उसकी भेंट अंशुमती से होती है। लोककथा में गंधर्वराज दोनों के विवाह को स्वीकारता है और राजकुमार को अपने खोए राज्य की पुनर्प्राप्ति में सहारा मिलता है।

अध्याय 3

राजकुमार को नया स्थान मिलने पर उसका पालन करने वाला परिवार भी भुलाया नहीं जाता। इस आख्यान की आत्मीयता दान से आगे जाकर साथ रहने में है। आज इसकी सीख यह हो सकती है कि सहायता पाने के बाद उन हाथों को याद रखें जिन्होंने अभाव में भी आपका साथ दिया था।

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