अध्याय 1
एक गरीब परिवार का युवक यात्रा में संकट से बचकर निकलता है। दूसरे नगर में उसे अनजाने में अपराधी समझकर रोक लिया जाता है। उसके पास तुरंत अपनी निर्दोषता सिद्ध करने का साधन नहीं होता।
अध्याय 2
घर में उसकी माता पुत्र की चिंता में शिव का स्मरण करती है। लोककथा में राजा को स्वप्न में युवक की निर्दोषता का संकेत मिलता है। राजा फिर उसकी बात सुनता है और बिना सुने लगाए गए आरोप की भूल समझता है।
अध्याय 3
युवक मुक्त होकर परिवार से मिलता है। राजा भी अन्याय सुधारने का प्रयत्न करता है। इस प्रसंग को पढ़ते समय धर्म का भाव केवल प्रार्थना में नहीं, निष्पक्ष सुनवाई में भी देखें। किसी व्यक्ति की गरीबी या असहायता को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।