अध्याय 1
त्रयोदशी की संध्या से जुड़े शिव-स्मरण को प्रदोष की परंपरा में महत्व दिया जाता है। अलग वारों पर पड़ने वाले प्रदोष के साथ अलग कथाएँ कही जाती हैं। यह सातों कथाओं तक पहुँचने का परिचय है, कोई एक सर्वमान्य प्राचीन कथा का दावा नहीं।
अध्याय 2
शनिवार के आख्यान में आश्रय पाने वाला राजकुमार है, रविवार में निर्दोष युवक की मुक्ति और अन्य वारों में आग्रह, सलाह, परीक्षा तथा भूल सुधारने के प्रसंग आते हैं। सभी का शब्दशः पाठ एक जैसा नहीं है।
अध्याय 3
अपने परिवार की परंपरा समझकर संबंधित कथा चुनें। यहाँ हर उपलब्ध वार-कथा का अलग पन्ना है। पढ़ने के बाद सोचें कि उसके पात्र की कौन-सी भूल या संवेदना आपके व्यवहार को बेहतर समझने में मदद करती है।