अध्याय 1
रात में शिकार की प्रतीक्षा करता एक व्यक्ति बेल के वृक्ष पर बैठा था। नीचे शिवलिंग था। जागते रहने और पत्तियाँ टूटकर गिरने की घटनाओं को लोककथा अनजाने हुए पूजन से जोड़ती है।
अध्याय 2
एक-एक कर आए मृग अपने बच्चों से मिलकर लौटने का वचन देते हैं। शिकारी उन्हें जाने देता है। जब परिवार अपने वचन के अनुसार लौट आता है, वह उनके विश्वास और स्नेह से भीतर तक बदल जाता है।
अध्याय 3
वह हथियार छोड़ देता है। कथा के धार्मिक रूप में शिव की कृपा और मुक्ति का वर्णन आता है। अपने मनन में देखें कि सामने वाले को केवल अपने लाभ का साधन समझना कैसे बदल सकता है। महाशिवरात्रि का जागरण भीतर की करुणा जागने की उपमा भी बन सकता है।