अध्याय 1
हिरण्यकशिपु अपनी सत्ता के आगे सबको झुकाना चाहता था। प्रह्लाद का विष्णु-स्मरण उसे चुनौती लगता था। होलिका के अग्नि-संबंधी वर की लोककथा इसी संघर्ष से जुड़ती है।
अध्याय 2
आख्यान में प्रह्लाद की रक्षा और होलिका का दहन होता है। भक्त-स्मृति इसे अत्याचार के अंत की आशा के रूप में याद करती है। होली की यह लोककथा और भागवत का नरसिंह-प्रसंग अलग स्तरों पर पढ़े जाते हैं।
अध्याय 3
अपने मनन में किसी मतभिन्न व्यक्ति पर शक्ति का दुरुपयोग न करें। उत्सव में सुरक्षित अग्नि, दूसरों की सहमति और पर्यावरण की जिम्मेदारी का ध्यान रखें।