Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

गुरु प्रदोष व्रत कथा

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अध्याय 1

वृत्रासुर से संघर्ष में देवता संकट अनुभव करते हैं। इंद्र अपने गुरु बृहस्पति से मार्ग पूछते हैं। कथा में गुरु एक पुराने प्रसंग द्वारा याद दिलाते हैं कि सामर्थ्य के साथ विनम्रता न हो तो उसका दुरुपयोग हो सकता है।

अध्याय 2

इंद्र शिव की आराधना और प्रदोष-संकल्प अपनाते हैं। युद्ध की परिस्थिति में उनका ध्यान केवल बल पर नहीं, सही मार्गदर्शन पर भी जाता है। परंपरागत आख्यान विजय को इस बदले हुए भाव से जोड़ता है।

अध्याय 3

गुरुवार के प्रदोष का यह पुनर्कथन किसी विरोधी को अनिष्ट पहुँचाने की विधि नहीं है। इसका मनन है—कठिन निर्णय से पहले जानकार से सलाह लें, अपने अहंकार को पहचानें और संघर्ष में भी न्याय की कसौटी न छोड़ें।

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