परिचय
सावित्री-सत्यवान और वट-वृक्ष से जुड़ा पूर्णिमा का रूप महाराष्ट्र समेत कई क्षेत्रों में मनाया जाता है। इसे अमावस्या वाले वट सावित्री से अलग तिथि पर पहचानें।
परंपरा और आपका दिन
यह वार्षिक पर्व का परिचय है। अमांत-पूर्णिमांत मास-नाम, संप्रदाय और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार तिथि-निर्णय में अंतर हो सकता है। अपने शहर के पंचांग में वर्तमान वर्ष की तिथि और पूजा-समय देखें।
परिवार की परंपरा के अनुसार कथा या स्तुति पढ़ें। बच्चों से पर्व का नाम, ऋतु और उसका भाव चर्चा में समझें। आज एक छोटा सेवा-संकल्प भी चुन सकते हैं।