परिचय
दत्तात्रेय के प्राकट्य का उत्सव विशेषकर महाराष्ट्र, कर्नाटक और दत्त-संप्रदायों में मनाया जाता है। गुरु-तत्त्व और प्रकृति से सीखने का भाव जुड़ा है।
परंपरा और आपका दिन
यह वार्षिक पर्व का परिचय है। अमांत-पूर्णिमांत मास-नाम, संप्रदाय और स्थानीय सूर्योदय के अनुसार तिथि-निर्णय में अंतर हो सकता है। अपने शहर के पंचांग में वर्तमान वर्ष की तिथि और पूजा-समय देखें।
परिवार की परंपरा के अनुसार कथा या स्तुति पढ़ें। बच्चों से पर्व का नाम, ऋतु और उसका भाव चर्चा में समझें। आज एक छोटा सेवा-संकल्प भी चुन सकते हैं।