अध्याय 1
युद्ध का साक्षी बने बर्बरीक के शीश से अंत में पूछा जाता है कि विजय का श्रेय किसे जाता है। योद्धा अपने-अपने पराक्रम को सबसे बड़ा मान रहे थे। साक्षी का उत्तर उनके व्यक्तिगत गर्व से आगे की दृष्टि देता है।
अध्याय 2
लोककथा में कृष्ण की व्यापक शक्ति और दैवी योजना का वर्णन आता है। बर्बरीक को श्याम नाम से पूजित होने का वर मिलता है। यही स्मृति खाटू श्याम की भक्ति में विशेष स्थान रखती है।
अध्याय 3
यह वरदान-प्रसंग क्षेत्रीय परंपरा के रूप में पढ़ें। आज की सीख यह हो सकती है कि किसी सफलता को केवल अपना कहना अधूरा है। साथ काम करने वाले, मार्गदर्शक और अनदेखे सहायक भी उसके हिस्सेदार होते हैं।