अध्याय 1
खाटू की लोकपरंपरा में भूमि के एक स्थान पर गाय के स्वतः दूध देने की कथा कही जाती है। खोज करने पर एक शीश मिलता है, जिसे श्रद्धालु बर्बरीक से जोड़कर पूजते हैं। यह आस्था-आख्यान है, पुरातात्त्विक प्रमाण का दावा नहीं।
अध्याय 2
राजा को स्वप्न में निर्देश मिलने और मंदिर-स्थापना की कथा आगे आती है। अलग स्थानीय विवरणों में नाम और क्रम बदलते हैं। भक्तों के लिए उस स्थान पर श्याम-स्मरण और मिलने का साझा केंद्र बनता है।
अध्याय 3
इस पुनर्कथन में प्राकट्य की लोकस्मृति का सम्मान है। वर्तमान मंदिर का इतिहास, दर्शन-व्यवस्था और मेले की जानकारी उसके आधिकारिक स्रोत से अलग जाँचें। भक्ति में भी कथा, ऐतिहासिक अभिलेख और आज की व्यवस्था की पहचान बनाए रखना उपयोगी है।