Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

रुक्मिणी का संदेश और कृष्ण

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अध्याय 1

रुक्मिणी कृष्ण को अपना मन बता चुकी थीं, पर उनके विवाह की व्यवस्था उनकी इच्छा के विपरीत की जा रही थी। वे एक विश्वस्त दूत के माध्यम से कृष्ण तक अपना संदेश पहुँचाती हैं। कथा में वे निर्णय लेने वाली सक्रिय पात्र हैं।

अध्याय 2

कृष्ण उनका संदेश स्वीकार कर आते हैं और आगे विवाह तथा संघर्ष का प्रसंग होता है। इस पुनर्कथन में मनन व्यक्ति की इच्छा और सहमति का सम्मान है। किसी संबंध में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, पर संबंधित व्यक्ति की गरिमा और स्पष्ट निर्णय को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।

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