ब्रज की परंपरागत कथा में गोवर्धन-पूजा के बाद भारी वर्षा हुई। बादल और आँधी बढ़ते गए तो लोगों और पशुओं के लिए आश्रय की चिंता खड़ी हुई। भागवत पुराण के इस प्रसंग में कृष्ण गोवर्धन को उठाकर सबको उसके नीचे आने का स्थान देते हैं।
आश्रय केवल किसी एक परिवार के लिए नहीं था। ब्रज के लोग, बच्चे और उनके पशु साथ रहे। कथा का ध्यान समुदाय के संरक्षण और कृष्ण पर उनके विश्वास की ओर जाता है। वर्षा समाप्त होने पर सब अपने जीवन की ओर लौटे।
यह भागवत पुराण 10.25 से जुड़ा मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन है। ग्रंथ का पूरा मूल पाठ और उसका अनुवाद स्रोत में अलग पढ़ सकते हैं। आज के लिए इसका एक मनन है: कठिन समय में मेरे आसपास किसे सुरक्षित जगह, साथ या व्यावहारिक सहायता की जरूरत है?