अध्याय 1
यमुना के एक जलभाग में कालिय के विष से जीवों और ग्वालों के जीवन पर संकट था। बालक कृष्ण उस भय का सामना करते हैं। आख्यान में संघर्ष और कालिय के फनों पर कृष्ण का नृत्य वर्णित है।
अध्याय 2
नाग-पत्नियों की प्रार्थना के बाद कालिय को प्राणदान और वहाँ से जाने का निर्देश मिलता है। कथा विनाश के साथ करुणा और जीवन की रक्षा का प्रश्न भी रखती है। अपना मनन नदी और साझा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी पर रखें। जल को विषैला बनाने वाली वास्तविक गतिविधियों को रोकना और सुरक्षित पानी के लिए काम करना आज की उपयोगी सेवा है।