अध्याय 1
रक्षासूत्र की लोकपरंपरा में शची द्वारा इंद्र के लिए मंगलकामना का प्रसंग आता है। रक्षा का धागा केवल भाई-बहन के संबंध तक सीमित नहीं रहा; अलग समुदायों ने इसे अलग रूपों में अपनाया है।
अध्याय 2
द्रौपदी-कृष्ण से जुड़ी लोकप्रिय कथा में चोट पर वस्त्र बाँधने का स्नेह और संकट में सहायता का प्रत्युत्तर कहा जाता है। यह लोकस्मृति महाभारत के हर संस्करण का शब्दशः अंश नहीं है।
अध्याय 3
इस प्रसंग को किसी संबंध पर अधिकार जताने के बजाय एक-दूसरे का सम्मान और साथ देने के भाव से पढ़ें। सुरक्षा का वचन सामने वाले की स्वतंत्रता सुनने और उसके निर्णय का आदर करने से भी निभता है।