अध्याय 1
छठ से जुड़ी परंपराएँ सूर्य के प्रकाश, षष्ठी देवी और परिवार के कल्याण का स्मरण करती हैं। प्रियव्रत और मालिनी के आख्यान में संतान के लिए व्याकुल दंपती को देवी का सहारा मिलता है।
अध्याय 2
लोकस्मृति में कर्ण की सूर्य-उपासना और द्रौपदी के संकल्प की कथाएँ भी छठ से जोड़ी जाती हैं। अस्त होते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का क्रम जीवन के दोनों छोरों को आदर देने का सुंदर भाव रखता है।
अध्याय 3
यह सामुदायिक पर्व तैयारी, स्वच्छता और सहयोग से निभता है। घाट पर सुरक्षा, पानी की स्थिति और शरीर की क्षमता का ध्यान रखें। व्रती का साथ देना केवल प्रशंसा करना नहीं; उसके काम का भार बाँटना और आवश्यकता सुनना भी है।