Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

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अध्याय 1

दैत्य मुर के अत्याचार से पीड़ित देवता विष्णु की शरण में पहुँचते हैं। लंबे संघर्ष के बाद विष्णु विश्राम के लिए एक गुफा में जाते हैं। मुर उन्हें असावधान समझकर वहीं आक्रमण करना चाहता है।

अध्याय 2

आख्यान में उसी समय दिव्य शक्ति का एक स्त्री-स्वरूप प्रकट होता है और मुर का सामना करता है। विष्णु जागकर उस शक्ति का सम्मान करते हैं। एकादशी के नाम से उसकी प्रतिष्ठा और व्रत की महिमा इसी कथा में कही जाती है।

अध्याय 3

उत्पन्ना का आशय उत्पत्ति से जुड़ा है; कथा एकादशी को केवल भोजन का नियम नहीं, सजगता की शक्ति के रूप में भी चित्रित करती है। इस मनन में भीतर की असावधानी पहचानें और अपने संकल्प को शांत, नियमित अभ्यास का रूप दें।

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