Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

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अध्याय 1

राजा वैखानस को एक स्वप्न अपने पिता की चिंता में डाल देता है। राज्य की सुविधा उसके मन की बेचैनी दूर नहीं करती। वह सभा और विद्वानों से सहायता लेकर ऋषि पर्वत के आश्रम तक जाता है।

अध्याय 2

ऋषि उसे मोक्षदा एकादशी की परंपरा और पितरों के लिए पुण्य अर्पित करने का भाव समझाते हैं। राजा श्रद्धापूर्वक संकल्प करता है। आख्यान में उसके पिता की मुक्ति का वर्णन इस साधना की फलश्रुति के रूप में आता है।

अध्याय 3

कथा के धार्मिक विश्वास को निश्चित परलोक-सूचना न मानें। आज का मनन है—पूर्वजों की स्मृति को उनके अच्छे काम आगे बढ़ाने से भी सम्मान मिलता है। परिवार के किसी बुज़ुर्ग की बात सुनना या उनकी याद में उपयोगी सेवा करना कृतज्ञता का एक सरल रूप है।

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आज के पाठ के बाद

कुछ क्षण शांत बैठें। पाठ का एक भाव चुनें और सोचें कि उसे अपने आज के व्यवहार में कैसे लाएँ। यह वेबसाइट का मौलिक मनन-सुझाव है।

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