Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

महिषासुर-मर्दिनी की कथा

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अध्याय 1

महिषासुर के अत्याचार से देवता संकट में पड़ते हैं। देवी-माहात्म्य के आख्यान में उनके संयुक्त तेज से देवी का प्राकट्य होता है। अनेक देवताओं के आयुध उन्हें मिलते हैं, पर संघर्ष का नेतृत्व देवी स्वयं करती हैं।

अध्याय 2

महिषासुर बार-बार रूप बदलकर सामना करता है। अंततः देवी उसका दमन करती हैं। दृश्य केवल बल का नहीं; भ्रम और अहंकार का चेहरा पहचानने का भी है। धार्मिक परंपरा इसे धर्म की विजय की स्मृति के रूप में मनाती है।

अध्याय 3

इस पुनर्कथन का मनन किसी मनुष्य-समूह को असुर ठहराना नहीं है। अपने भीतर के अन्याय, अहंकार और दूसरों को दबाने की प्रवृत्ति को पहचानें। साहस तब अर्थपूर्ण है जब वह कमजोर की रक्षा और न्याय के पक्ष में खड़ा हो।

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