अध्याय 1
जलाशय में उतरा गजराज एक मगर के पकड़ लेने पर संघर्ष में फँस जाता है। उसका बल लंबे समय तक काम आता है, पर धीरे-धीरे थकान बढ़ती है। साथ आए जीव भी उसे छुड़ा नहीं पाते। संकट में उसे अपनी सीमा का बोध होता है।
अध्याय 2
गजेन्द्र विष्णु का स्मरण करके सहायता की पुकार करता है। आख्यान भगवान के आगमन और गजेन्द्र की मुक्ति को कहता है। इसका मनन सहायता माँगने में संकोच छोड़ना हो सकता है। वास्तविक संकट में बचाव और विशेषज्ञ सहायता बुलाना आवश्यक है; प्रार्थना उस प्रयास का निजी सहारा बन सकती है।