अध्याय 1
दशावतार का क्रम विष्णु की अनेक अवतार-परंपराओं का एक प्रसिद्ध चयन है। मत्स्य में संरक्षण, कूर्म में सहारा, वराह में पृथ्वी का उद्धार, नरसिंह में प्रह्लाद की रक्षा और वामन में बलि से संवाद के आख्यान आते हैं।
अध्याय 2
परशुराम, राम और कृष्ण के प्रसंग अलग युगों में धर्म के जटिल प्रश्न सामने रखते हैं। अंतिम स्थानों पर बुद्ध अथवा बलराम की सूची-भिन्नता मिलती है; कल्कि को भविष्य की धार्मिक कल्पना से जोड़ा जाता है। इसे सभी परंपराओं की एकमात्र स्थिर सूची न मानें।
अध्याय 3
इस यात्रा को अलग कथाओं का प्रवेश-द्वार समझें। प्रत्येक अवतार की कथा अपने संदर्भ में पढ़ें। एक समान मनन है—जब शक्ति, जीवन या न्याय पर संकट हो, तब संरक्षण और जिम्मेदारी किस रूप में सामने आ सकती है?