अध्याय 1
चित्रगुप्त के आख्यान में कर्मों का लेखा और उत्तरदायित्व प्रमुख हैं। कुछ परंपराएँ उनकी उत्पत्ति को ब्रह्मा से जोड़ती हैं। पूजन में लेखनी और बही का स्थान इस बात की याद दिलाता है कि हमारे कामों का प्रभाव रहता है।
अध्याय 2
यम द्वितीया के अलग प्रसंग में यम अपनी बहन यमुना के यहाँ आते हैं। बहन उनका आदर करती है और भाई-बहन का स्नेह उत्सव का कारण बनता है। इसे भाई दूज की कथा से भी जोड़ा जाता है।
अध्याय 3
इन दोनों परंपराओं को साथ पढ़ते हुए हिसाब और संबंध की दो दिशाएँ दिखती हैं। अपना लेखा ईमानदार रखें और रिश्तों में मिलने का समय निकालें। किसी जाति या जन्म को श्रेष्ठ ठहराने के बजाय सबकी समान गरिमा के साथ इतिहास और लोकविश्वास को समझें।