अध्याय 1
राजा भरत ने राजपाट छोड़कर साधना का मार्ग लिया था। एक असहाय मृग-शावक की रक्षा करते-करते उनका मन उसकी चिंता में इतना उलझता है कि साधना पीछे छूटने लगती है। भागवत कथा इस आसक्ति के परिणाम को पुनर्जन्म के प्रसंग से समझाती है।
अध्याय 2
आगे जड़भरत की स्मृति आती है, जहाँ साधक फिर विवेक की ओर लौटता है। इसका मनन जीव-दया छोड़ना नहीं है। सहायता करते हुए अपनी जिम्मेदारियों और मन के संतुलन की पहचान बनाए रखें। करुणा और मोह में अंतर समझना किसी प्रिय के प्रति संवेदना कम करना नहीं।