Baba Ka Sandeshप्रेम · सेवा · स्मरण

BABA KA SANDESH · LEARN & REMEMBER

अम्बरीष और दुर्वासा की कथा

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अध्याय 1

राजा अम्बरीष व्रत के पारण का समय और अतिथि दुर्वासा की प्रतीक्षा—दोनों के बीच धर्मसंकट अनुभव करते हैं। सलाह लेकर वे थोड़ा जल ग्रहण करते हैं। लौटे ऋषि इसे अपना अनादर समझकर क्रोधित होते हैं।

अध्याय 2

भागवत का आख्यान क्रोध, सुदर्शन और अंततः क्षमा की शरण तक जाता है। अम्बरीष प्रतिशोध के बजाय अतिथि के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। इस कथा में केवल नियम नहीं, भाव और विनम्रता का प्रश्न भी है। मनन करें कि किसी की परिस्थिति जाने बिना अपने अपमान का निष्कर्ष निकालना संबंधों को कैसे चोट पहुँचाता है।

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