अध्याय 1
अजामिल की कथा एक ऐसे व्यक्ति को सामने रखती है जो अपने पुराने सदाचार से दूर चला गया था। अंत समय की पुकार में अपने पुत्र का नाम लेते हुए उसके मुख से नारायण नाम निकलता है। धार्मिक आख्यान में यमदूत और विष्णुदूत के संवाद से न्याय और कृपा का प्रश्न उठता है।
अध्याय 2
कथा उसे सुधरने का अवसर देती है। उसे अपनी स्थिति समझ आती है और वह नया जीवन साधना में लगाता है। इस पुनर्कथन का भाव किसी भी गलत काम को नाम-जप से स्वतः मिटा देने का प्रमाणपत्र नहीं। अपनी भूल स्वीकारना, उससे होने वाला नुकसान रोकना और व्यवहार बदलना भी जरूरी है।