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नंदी · भक्ति और मनन

परंपरागत परिचय और अपने संग्रह में उपलब्ध संबंधित पाठ।

नंदी

Nandi · प्रतीक्षा · निष्ठा · द्वारपाल

परिचय

नंदी शिव के वाहन, गण-प्रमुख और द्वारपाल — शिलाद ऋषि के तप से जन्मे। कहते हैं शिव के पास जो भी बात पहुँचानी हो, नंदी के कान में कहो — वे पहुँचा देते हैं। उन्होंने रावण को कैलाश उठाने से पहले रोका था, और समुद्र-मंथन के विष की जो बूँदें ज़मीन पर गिरीं, उन्हें उन्होंने चाटा। निष्ठा का अर्थ यही है — दरवाज़े पर खड़े रहना, चाहे भीतर बुलावा कभी न आए।

आज का मौलिक मनन

नंदी युगों से बैठे हैं, बिना उकताए। प्रतीक्षा भी साधना है, अगर मुँह सही दिशा में हो।

हर शिव मंदिर के सामने नंदी बैठे हैं — मुँह शिव की ओर, युगों से, बिना उकताए, बिना यह पूछे कि दरवाज़ा कब खुलेगा। हमारे लिए प्रतीक्षा सज़ा है — पाँच मिनट की लाइन में फ़ोन निकल आता है, एक हफ़्ते के जवाब में मन उखड़ जाता है। पर प्रतीक्षा अपने आप में कुछ नहीं है; फ़र्क़ इससे पड़ता है कि इंतज़ार में तुम्हारा मुँह किस दिशा में है। सही दिशा में शांत बैठा हुआ इंतज़ार साधना है। आज कुछ प्रतीक्षा करो — बिना भागे, बिना स्क्रॉल किए।

छोटा अभ्यास

आज किसी चीज़ का इंतज़ार शांति से करो — बिना फ़ोन देखे।

आज जब भी प्रतीक्षा करनी पड़े — लाइन में, ट्रैफ़िक में, किसी के आने में, किसी जवाब में — फ़ोन मत निकालो। सीधे बैठो या खड़े रहो, साँस देखो, और मन ही मन "ॐ नमः शिवाय" धीरे-धीरे। प्रतीक्षा को खाली समय मत समझो; उसे नंदी की तरह बैठने का समय समझो। शाम को गिनो कि कितनी बार ऐसा किया।

ये मौलिक devotional reflections हैं; भविष्यवाणी या किसी देवता का उद्धरण नहीं।

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