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धन्वंतरि · भक्ति और मनन

परंपरागत परिचय और अपने संग्रह में उपलब्ध संबंधित पाठ।

धन्वंतरि

Dhanvantari · स्वास्थ्य · औषधि · संतुलन

परिचय

समुद्र-मंथन के अंत में धन्वंतरि अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए — विष्णु के अवतार, आयुर्वेद के प्रवर्तक, देवताओं के वैद्य। धनतेरस उन्हीं का दिन है — दीपावली से दो दिन पहले, जब स्वास्थ्य को धन से पहले रखा जाता है। काशी के राजा दिवोदास के रूप में उन्होंने सुश्रुत को शल्य-चिकित्सा सिखाई। उनकी सीख सरल है: रोग आने से पहले दिनचर्या ही औषधि है।

आज का मौलिक मनन

शरीर मंदिर है, सिर्फ़ कहने के लिए नहीं। आज उसकी एक बात सुनो — नींद, पानी, चलना।

"शरीर मंदिर है" — यह वाक्य हम कहते हैं और फिर उसी मंदिर में देर रात तक स्क्रीन, आधी नींद, प्यास को चाय से बुझाना, और चलना सिर्फ़ गाड़ी तक। मंदिर की देखभाल रोज़ होती है, साल में एक बार नहीं। धन्वंतरि हाथ में अमृत-कलश लिए हैं — पर अमृत कोई गोली नहीं है; वह नींद है, पानी है, चलना है, समय पर भोजन है। आज शरीर की एक बात सुनो जिसे तुम महीनों से अनसुना कर रहे हो, और आज ही उसका जवाब दो।

छोटा अभ्यास

आज 30 मिनट पैदल और सोने का समय तय।

आज 30 मिनट पैदल चलो — एक बार में या दो बार में, फ़ोन जेब में, नज़र सामने। और आज रात सोने का समय अभी तय करो — घड़ी देखो, एक समय चुनो, और उससे 30 मिनट पहले स्क्रीन बंद। पानी की बोतल मेज़ पर रखो और शाम तक ख़ाली करो। तीनों में से एक भी छूटे तो कल फिर — पर आज शुरू।

ये मौलिक devotional reflections हैं; भविष्यवाणी या किसी देवता का उद्धरण नहीं।

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