
Chandra · मन · शीतलता · लय
परिचय
चंद्रमा शिव के मस्तक पर हैं — दक्ष के शाप से क्षय रोग हुआ तो शिव ने उन्हें शरण दी, और तब से वे घटते हैं पर मिटते नहीं। सोमवार चंद्र का दिन है, शिव का दिन है; मन और चंद्र एक ही तत्व हैं — शीतलता, लय, ज्वार-भाटा। भारतीय पंचांग तिथि चंद्रमा से गिनता है: हर व्रत, हर पर्व उसी की कला से बँधा है।
आज का मौलिक मनन
मन घटता-बढ़ता है, यही उसका स्वभाव है। आज उससे लड़ो मत — बस देखो।
चंद्रमा पंद्रह दिन बढ़ता है, पंद्रह दिन घटता है — और कोई उसे दोष नहीं देता। पर अपने मन के साथ हम यही करते हैं: उदास हुए तो "मुझे क्या हो गया", उत्साहित हुए तो "यह टिकेगा नहीं"। मन का स्वभाव ही लहर है; उसे थामने की कोशिश में हम थकते हैं, वह नहीं। आज अपने मन से लड़ो मत, उसे ठीक करने की कोशिश मत करो — बस देखो, जैसे आसमान चाँद को देखता है। देखने वाला वही रहता है, चाँद घटे या बढ़े।
छोटा अभ्यास
आज रात 10 मिनट बिना स्क्रीन, आसमान देखो।
आज रात सोने से कम से कम 10 मिनट पहले सारी स्क्रीन बंद कर दो। छत पर, बालकनी में या खिड़की से आसमान देखो — चाँद दिखे तो उसे, न दिखे तो अँधेरे को। कुछ सोचना नहीं है; जो विचार आएँ, उन्हें भी चाँद की तरह आते-जाते देखो। फिर सो जाओ।
ये मौलिक devotional reflections हैं; भविष्यवाणी या किसी देवता का उद्धरण नहीं।