
Bhairav · रक्षा · समय · सजगता
परिचय
ब्रह्मा के पाँच सिर थे और पाँचवाँ सिर अहंकार से शिव की निंदा करने लगा; शिव के क्रोध से भैरव प्रकट हुए और उन्होंने वह सिर काट दिया। ब्रह्महत्या का वह कपाल उनके हाथ में चिपक गया और वे भटकते रहे — काशी पहुँचकर ही मुक्त हुए। तभी से वे काशी के रक्षक हैं: हर यात्री पहले कालभैरव के दर्शन करता है। उनका वाहन कुत्ता है — सजगता का प्रतीक, जो रात में भी जागता है।
आज का मौलिक मनन
समय किसी का इंतज़ार नहीं करता। जो आज करना है, आज। भैरव द्वार पर खड़े हैं।
भैरव काशी के कोतवाल हैं — काल के भी स्वामी, इसलिए "कालभैरव"। समय उनका है, और समय किसी का इंतज़ार नहीं करता। हम "कल से" कहते हैं जैसे कल हमारा हो; पर कल का कोई वादा किसी को नहीं मिला। जो काम आज का है — फ़ोन, माफ़ी, शुरुआत, अंत — उसे आज न करने का मतलब है कि तुमने मान लिया कि कल मिलेगा। भैरव द्वार पर खड़े हैं, हाथ में दंड, साथ में कुत्ता — वे डराते नहीं, याद दिलाते हैं: समय जा रहा है, तुम कहाँ हो?
छोटा अभ्यास
आज एक समय-सीमा तय करो और उसे निभाओ।
आज एक काम चुनो जिसकी कोई समय-सीमा नहीं है और इसीलिए वह महीनों से लटका है। उसकी एक तारीख़ और समय तय करो — आज या इसी हफ़्ते — और कैलेंडर में लिखो, किसी एक व्यक्ति को बता दो कि तुम यह तब तक करोगे। जब समय आए, बिना बहाने के करो। समय-सीमा दबाव नहीं है — भैरव का दंड है, जो तुम्हें आगे धकेलता है।
ये मौलिक devotional reflections हैं; भविष्यवाणी या किसी देवता का उद्धरण नहीं।